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उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में लंबित है, लेकिन सरकार संविधान और कानून के दायरे में रहकर हर संभव मदद करने को तैयार है
कोलकाता। शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर नाराजगी और आक्रोश एक बार फिर उभरकर सामने आया है। योग्य होते हुए भी नौकरी से वंचित करीब 26,000 शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। गुरुवार रात से ही एसएससी वंचित शिक्षकों का एक समूह विकाश भवन के सामने आमरण अनशन पर बैठ गया है, जिसमें 10 शिक्षक शामिल हैं। उनकी मुख्य मांग है कि योग्य अभ्यर्थियों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए और हक की नौकरी किसी भी सूरत में छीनी न जाए। शुक्रवार को आंदोलन कर रहे योग्य शिक्षकों के अधिकार मंच के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य विधानसभा पहुंचकर विधानसभाध्यक्ष विमान बनर्जी से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में संगीता साहा, अर्पिता सेनगुप्ता, राकेश आलम, रूपा कर्मकार और स्मृति राय शामिल थे। पहले से ही मंच की ओर से स्पीकर को पत्र भेजा गया था, जिसमें हस्तक्षेप की अपील की गई थी।
विधानसभाध्यक्ष ने इस अपील को गंभीरता से लिया और शुक्रवार को प्रतिनिधियों से भेंट की।प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभाध्यक्ष के समक्ष पांच सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें योग्य उम्मीदवारों की शिनाख्त के लिए शपथपत्र, प्रमाणपत्र और ओएमआर शीट्स की मिरर इमेज सार्वजनिक की जाए, ताकि कोर्ट यह तय कर सके कि कौन योग्य है और कौन नहीं। दूसरा न्यायिक प्रक्रिया एक तय समयसीमा में पूरी की जाए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। तीसरा कोई भी नई परीक्षा प्रक्रिया तब तक शुरू न हो, जब तक कोर्ट द्वारा पिछली प्रक्रिया पर अंतिम फैसला न आ जाए। चौथा योग्य लेकिन नौकरी से वंचित अभ्यर्थियों को त्वरित नियुक्ति प्रदान की जाए, बिना उन्हें दोबारा परीक्षा देने के और पांचवी मांग है कि मुख्यमंत्री को आंदोलनकारी शिक्षकों के साथ सीधा संवाद करना चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।विधानसभाध्यक्ष ने प्रतिनिधियों को संवेदनशीलता और न्याय की भावना से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में लंबित है, लेकिन सरकार संविधान और कानून के दायरे में रहकर हर संभव मदद करने को तैयार है। योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।